Saturday, 6 April 2019

नेगेटिव होना

मैं नेगेटिव हो जाता हूँ
जब उठाता हूँ सवाल
होने पर और न होने पर,
मैं नेगेटिव हो जाता हूँ
जब मैं सोचता हूँ
कि यह जो है वह क्यों है।
मैं नेगेटिव हूँ
क्योंकि मुझे दिखती है
उधड़ी  खाल और रिसता हुआ खून।
मैं नेगेटिव हूँ
क्योंकि मैंने देखी है
सुबह की ट्रेन से जाते मजदूर,
उनके टिफिन की सुखी रोटियां
जवानों की लाशें
रोटी हुई माँ
चूड़ी तोड़ती पत्नी
बिना बाप के बच्चे
और उनकी शव यात्रा में हंसते हुए लोग
मैं नेगेटिव हूँ
क्योंकि मैंने देखा है जलते अरमानो की रोशनी में चमकता विकास
मैं नेगेटिव हूँ
क्योंकि देख लेता हूँ
मन्दिर और मजारो के बाहर
 ठंड में ठिठुरते भिखारी
पहचान लेता हूँ
कलम के जिगोलो को
महसूस कर लेता हूँ
जेठ की दुपहरी में
गंगा की रेती पर बैठे निराला का दर्द
अगर ये नगेटिव होना है तो...
हा मैं नेगेटिव हूँ।

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